यदि आप और मुंबई के डार्क इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यह एक शानदार डॉक्यूमेंट्री है। यह आपको सोचने पर मजबूर कर देती है कि न्याय और अपराध के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है।
यह डॉक्यूमेंट्री 1990 के दशक के मुंबई की असल कहानी दिखाती है, जब शहर "डी-कंपनी" और दाऊद इब्राहिम के खौफ में था। यह फिल्म मुख्य रूप से पुलिस अधिकारियों के उदय और उनके द्वारा माफिया राज को खत्म करने के विवादास्पद तरीकों पर आधारित है। गहरा विश्लेषण (Deep Review) 1. विषय और कहानी (Theme & Narrative)
कुछ आलोचकों का मानना है कि फिल्म पुलिस के पक्ष को ज्यादा ग्लोरिफाई (महिमामंडन) करती है और उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की गहराई में नहीं जाती।
इसमें हिंदी और अंग्रेजी दोनों ऑडियो ट्रैक होने चाहिए, जिससे आप अपनी पसंद की भाषा चुन सकते हैं। 4. फिल्म की कमियां
फिल्म में 90 के दशक के असली समाचार फुटेज और क्राइम सीन की तस्वीरों का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है, जो इसे बहुत प्रामाणिक (authentic) बनाता है।